एन्. एच्. ऐ. डि. सि. एल्. संस्थया इ. पि. सि.-अनुबन्धकस्य विपदे व्यये च 0.3 कि. मी. यावत् मार्गस्य रक्षणम् निष्पाद्यते।
एन्. एच्. ऐ. डी. सी. एल्. (न्याशनल्-हैवेस्-एण्ड्-इन्फ्रास्ट्रक्चर्-डेवेलप्मेण्ट्-कार्पोरेशन्-लिमिटेड्) मणिपूर्-राज्यस्य एन्. एच्.-37 (इम्फाल्-जिरीबाम्-मार्गः) इत्यस्य 0.3 कि. मी. परिमितेः खण्डे उदयोन्मुख-रक्षण-कार्यस्य कृते प्रस्तावान् आमन्त्रयति। विद्यमानस्य ई. पी. सी.-ठेकेदारस्य अपाय-व्ययेन च प्रतिशत-दरस्य तथा कार्य-आदेशस्य आधारेण कार्यं निष्पाद्यते।
निवेदकर्ः एकमातर्-सङ्स्थाः विभितुम्-अरहन्ती (सङ्कीतः-उदयनम्-अनुस्मतीः नस्ति). तेषण्-गट् 3 वर्शेशु-न्युनत्म् ₹ 2 लक्षम् (जी. एस्. टी. ईत्स्य आत्मिकत्न्) वर्शेक्-वर्शेक्-व्ययः 5 लक्षम्-राष्ट्र-अधिकारः।
- अनुमानितव्ययः रु. 69.36 लाख (जी. एस. टी. इत्यस्य अतिरिक्तं)
- बिड-प्रतिभूति/इ. एम्. डि.: रु. 0.69360 लक्ष (प्रायः रु. 69,360)
- निविदापत्रस्य प्रकारः ई-निविदापत्रस्य माध्यमेन एकल-प्रतिशत-दर-निविदापत्राणि
- बोली-प्रादेशिक-प्रतिष्ठितिः 04-07-2026 (15:00 Hr.)
- बोली-मान्यताः बोली-देय-दिनाङ्कात् 120 दिनानि यावत्
- अनुबंध अवधिः 3 महीने
- बोली-दस्तावेजों की लागतः 11,800 रुपये (गैर-वापसी योग्य)
प्रलेखात् ए. ऐ. इत्यनेन लिखितं, तस्य विरुद्धं परीक्षितं च। अधः मूलम् आधिकारिकम् अस्ति।
मूललेखः
दस्तावेज विवरण
| आधिकारिकं नाम | "इम्फाल्-जीरीबाम्-मार्ग्-खाण्डे (95.500Km) एन्. एच्.-37 (पुरत्न्-एन्. एच्.-53) इति अर्थः 4-लेन्-पुलेस्-निर्मेयं" इति-परिवारः "वरत्मेस्-मार्गनिर्देशक-ऐ. पी. पी. पी. सी. सी. पी. पी. सी. पी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. पी. सी. सी. पी. सी. पी. सी. |
| स्रोत-शरीरम् | राष्ट्रिय-राजमार्ग-अवसंरचना-विकास-निगमः (एन्. एच्. ऐ. डि. सि. एल्.) |
| सन्दर्भसङ्ख्या | — |
| स्थितिः। | बन्धितः। (अभिलेखः) |
| वर्षः | 2026 |
| समाप्तितिथिः | 09-07-2026 |
| दस्ताबेजः | 4 · प्रकाशनानन्तरं 2 × परिवर्तितम्। |
नागरिकः पृच्छेताम् निरीक्षणानि प्रश्नानि च।
अभिलेखेभ्यः यान्त्रिकरूपेण दत्तानि तथ्यात्मकानि निरीक्षणानि-न तु निष्कर्षाणि वा आरोपाः वा। प्रत्येकम् मूलस्य विरुद्धम् प्रमाणयतु।
- प्रथमं प्रकाशित्वा विभागः एतत् पत्रं द्विवारं परिवर्तयत्।
- प्रत्येकं संशोधनं किमर्थं प्रेरितम्, अपि च निविदाकारान् प्रत्युत्तरं दातुं समयं दातुं समाप्तिदिनाङ्कः वर्धिता?
- अर्हता, परिधि-आवश्यकताः च कथित-उद्देश्यस्य, अनुमानित-मूल्यस्य च अनुरूपानि सन्ति वा?
- सर्वाणि संशोधनानि समयसीमायाः पूर्वं पोर्टल्-मध्ये प्रकाशितानि आसन् वा?
आर्. टि. ऐ. इत्यस्य प्रारूपं कृत्वा पृच्छतु यत् अभिलेखेषु किं नास्ति इति।