न्यायालयसभ सर्वोच्च न्यायालय
सर्वोच्च न्यायालय डी. वी. सी. शुल्क मामलामे पूर्ववर्ती निर्णयकेँ पलटबाक लेल ए. पी. टी. ई. एल. क आलोचना कयलक।
ई मामला दामोदर घाटी निगम (डी. वी. सी.) लेल 2009-2014 अवधिक लेल बिजली शुल्क पर विवादसँ संबंधित अछि, विशेष रूपसँ की'सिंकिंग फंड'केँ पूँजी परिसम्पत्तिक मूल्यह्रासक सङ्ग शुल्कमे शामिल कयल जा सकैत अछि।
उच्चतम न्यायालय विद्युत लेल अपीलीय न्यायाधिकरणक एक आदेशक समीक्षा कऽ रहल अछि जे एहि मुद्दे पर उच्चतम न्यायालयक पूर्ववर्ती आदेशकेँ खारिज कऽ देलक।
ई कोना चिन्ता करैत अछिः अपीलकर्ताः दामोदर घाटी निगम; उत्तरदाताः मैथन अलॉयज लिमिटेड और अन्य; मध्यस्थः स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड; पीठः न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन।
अदालत की फैसला कयलक?
- न्यायालय अपीलीय न्यायाधिकरणक आदेशक'न्यायिक अनुशासनक स्पष्ट उल्लंघन'आ भास्कर श्रची मिश्र धातु लिमिटेड बनाम दामोदर घाटी निगममे बाध्यकारी उदाहरणकेँ रद्द कऽ संविधानक अनुच्छेद 141क उल्लंघन करबाक लेल आलोचना कयलक।
- न्यायालय विद्युत अधिनियम, 2003, दामोदर घाटी निगम अधिनियम, 1948, आ प्रशुल्क विनियमक बीच परस्पर क्रियाक जाँच कयलक, विशेष रूपसँ विद्युत अधिनियमक धारा 174 आ धारा 14क चतुर्थ परंतुक पर ध्यान केन्द्रित कयलक।
- न्यायालय नोट कयलक जे न्यायाधिकरणक विवादित आदेश डी. वी. सी. केँ'दोहरा लाभ'क निष्कर्षक आधार पर या तँ डूबैत कोष या मूल्यह्रासक दावा करबाक अनुमति देलक, मुदा दुनू नहि, जकर न्यायालय वर्तमानमे वैधानिक प्रावधानक विरुद्ध मूल्यांकन कऽ रहल अछि।
दस्तावेजमे सेहो
- न्यायालय कहलनि जे न्यायाधिकरणक आदेश मूल 2019क आदेशक पाँच सालसँ बेसी समय बाद दायर एक पुनरीक्षण याचिका मे पारित कयल गेल छल।
- विद्युत अधिनियमक धारा 14क चतुर्थ परंतुकक हवाला दैत न्यायालय एहि बात पर जोर देलक जे डी. वी. सी. पर डी. वी. सी. अधिनियमक प्रावधान एहि हद धरि लागू होइत अछि जे ओ विद्युत अधिनियम, 2003क सङ्ग असंगत नहि अछि।
- न्यायालय एहि तर्ककेँ खारिज कऽ देलक जे धारा 14क चौथा परंतुक केवल अनुज्ञापत्रक अनुदान धरि सीमित अछि, ई अभिनिर्धारित करैत जे ई डी. वी. सी. अधिनियमकेँ शुल्क निर्धारण सहित अन्य सब पहलू पर डी. वी. सी. केँ लागू करबामे सक्षम बनबैत अछि।
ई कोना लिखल गेल छल?
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ओ जाँच तुलना करैत अछि। संख्यासभ मात्र। ई एहि बातक पुष्टि नहि कऽ सकैत अछि जे दस्तावेज जे कहैत अछि ओ शब्द कहल जाइत अछि-तेँ मूल दस्तावेज हमेशा प्राधिकरण होइत अछि।
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मूल दस्तावेज
भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ
अदालतक आदेश · 30 अक्टूबर 2026
एकरा एतऽ पढ़ू।
चर्चा।
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