Saturday, 31 October 2026 कौन ज़िम्मेदार?
कौन ज़िम्मेदार?KaunZimmedar

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न्यायालयसभ सर्वोच्च न्यायालय

इलाहाबाद उच्च न्यायालय उच्चतम न्यायालयक'मृत'अधिनियमक अवलोकन पर उत्तर प्रदेशसँ जवाब मांगलक।

एहि मामलामे भीमसेन सिंह आ अन्य द्वारा दायर आवेदन शामिल अछि जे यू. पी. क तहत शुरू कयल गेल कार्यवाहीकेँ चुनौती दैत अछि।

गैंगस्टर आ एंटी सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट, 1986, उच्चतम न्यायालयक एकटा हालिया निर्णय पर निर्भर करैत अछि जाहिमे कहल गेल अछि जे अधिनियममे परिभाषित अपराधक लेल एकटा विशिष्ट दंडात्मक प्रावधानक अभाव अछि।

ई कोना चिन्ता करैत अछिः याचिकाकर्ताः भीमसेन सिंह उपनाम राजू; प्रतिवादीः यू. पी. राज्य द्वारा. राजकुमार. सचिव. गृह विभाग. एल. के. ओ. आ दोसर; पीठः माननीय राजीव सिंह, जे. (इलाहाबाद उच्च न्यायालय)।

अदालत की फैसला कयलक?

  • न्यायालय याचिकाकर्ता सभक वकील आ राज्यक अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता (ए. जी. ए.) के तर्क सुनलनि।
  • याचिकाकर्ता लोकनि प्रस्तुत कयलनि जे सर्वोच्च न्यायालय'शिव प्रताप सिंह @चिनू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य आ अन्य'(2026 एससीसी ऑनलाइन एससी 1677) मे'नुल्ला पोएना साइन लेग'क सिद्धांतकेँ लागू कयलक आ नोट कयलक जे अधिनियमक धारा 2'गैंग'आ'गैंगस्टर'केँ परिभाषित करैत अछि जखन कि धारा 3 दंड निर्धारित करैत अछि, मुदा अधिनियम विशेष रूपसँ अपराधक रूपमे वर्णित कार्रवाईकेँ दंडित नहि करैत अछि।
  • याचिकाकर्ता सभक तर्क छल जे पहिनेसँ अलग-अलग आरोप-पत्र द्वारा आच्छादित आपराधिक गतिविधि सभक लेल गैंगस्टर अधिनियमक तहत व्यक्ति पर मुकदमा चलायब भारतक संविधानक अनुच्छेद 20क उल्लंघन अछि।
  • दस्तावेजमे उच्चतम न्यायालयक फैसलाक आवेदकसभक प्रस्तुतिकेँ आ अंशकेँ दर्ज कयल गेल अछि मुदा एहि विशिष्ट पाठमे इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा देल गेल कोनो अंतिम आदेश, राहत, वा अगिला तारीखक उल्लेख नहि कयल गेल अछि।

दस्तावेजमे सेहो

  • ई पाठ इलाहाबाद उच्च न्यायालयक आदेश (2026क आवेदन धारा 528 बी. एन. एस. एस. संख्या 6109) क एकटा अंश अछि जाहिमे उच्चतम न्यायालयक निर्णय पर चर्चा कयल गेल अछि।
  • पाठमे उद्धृत उच्चतम न्यायालयक निर्णय एहि बात पर जोर दैत अछि जे यू. पी. अधिनियम आ नियम एहि आधार पर चलैत अछि जे अधिनियममे विशेष रूपसँ कोनो अपराधक प्रावधान अछि, जकरा न्यायालय अनुपस्थित बतबैत अछि।
  • पाठमे यू. पी. गैंगस्टर एक्टक धारा 2 आ 3 आ नियम 3 आ 4क विस्तृत अंश शामिल अछि जेना उच्चतम न्यायालयक निर्णयमे संदर्भित अछि।

ई कोना लिखल गेल छल?

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ओ जाँच तुलना करैत अछि। संख्यासभ मात्र। ई एहि बातक पुष्टि नहि कऽ सकैत अछि जे दस्तावेज जे कहैत अछि ओ शब्द कहल जाइत अछि-तेँ मूल दस्तावेज हमेशा प्राधिकरण होइत अछि।

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मूल दस्तावेज

भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ

अदालतक आदेश · 30 अक्टूबर 2026

आदेश। 30 अक्टूबर 2026 · 0.1 एमबी दस्तावेज खोलू। livelaw.in पर
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