न्यायालयसभ सर्वोच्च न्यायालय
सर्वोच्च न्यायालय कर्नाटकक भ्रष्ट 2011 सिविल सेवा चयनकेँ मान्य करैवला कानूनकेँ खारिज कऽ देलक।
ई मामला कर्नाटक सिविल सेवा (2011 बैच राजपत्रित परिवीक्षाधीनक चयन आ नियुक्ति) अधिनियम, 2022केँ चुनौतीसँ संबंधित अछि, जे 2011क भर्ती प्रक्रियाकेँ मान्य करबाक प्रयास करैत छल, जकरा पहिने रद्द कऽ देल गेल छल।
ई मामला कर्नाटक सिविल सेवा (2011 बैच राजपत्रित परिवीक्षाधीनक चयन आ नियुक्ति) अधिनियम, 2022क चुनौतीसँ संबंधित अछि, जे 2011क भर्ती प्रक्रियाकेँ मान्य करबाक प्रयास करैत छल जे पहिने भ्रष्टाचार आ भाई-भतीजावादक कारण रद्द कऽ देल गेल छल। मुख्य मुद्दा ई अछि जे की राज्य विधानमंडल चयन प्रक्रियाकेँ अमान्य करैवला न्यायिक निर्णयकेँ प्रत्यक्ष रूपसँ रद्द कऽ सकैत अछि।
ई कोना चिन्ता करैत अछिः अपीलकर्ताः श्रीनिवास टी. ओ. आर. एस.; उत्तरदाताः कर्नाटक राज्य आ ओ. आर. एस. पीठः न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन।
अदालत की फैसला कयलक?
- न्यायालय 2022क अधिनियमकेँ असंवैधानिक घोषित कयलक।
- न्यायालय 2022क अधिनियमकेँ रद्द कऽ देलक।
- न्यायालय जनहित याचिका आ रिट याचिका दुनूमे उच्च न्यायालयक विवादित निर्णयकेँ खारिज कऽ देलक।
- अदालत अपीलार्थीकेँ याचिकाकर्ता के रूप मे स्थानांतरित करैत जनहित याचिका (पी. आई. एल.) के अनुमति देलक।
- न्यायालयक निर्णय छल जे विधायिका बादक कानून द्वारा अंतिम निर्णयकेँ प्रत्यक्ष रूपसँ रद्द नहि कऽ सकैत अछि।
दस्तावेजमे सेहो
- न्यायालय नोट कयलक जे 2011क भर्ती व्यापक भ्रष्टाचार आ स्पष्ट भाई-भतीजावादके कारण रद्द कऽ देल गेल छल, जकरा उच्च न्यायालय आ सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पहिल कार्यवाहीमे बरकरार राखल गेल छल।
- 2022क अधिनियमकेँ बरकरार रखयवला उच्च न्यायालयक पहिल आदेशक संबंधमे न्यायालय'किछु आश्चर्य आ बहुत अधिक आशंका'व्यक्त कयलक।
- न्यायालय एहि सिद्धान्तक हवाला देलक जे यद्यपि विधायिका दोषकेँ दूर करबाक लेल पूर्वव्यापी रूपसँ कानूनमे संशोधन कऽ सकैत अछि, मुदा ई व्यक्तिगत अधिकार आ देनदारिकेँ प्रभावित करैवला अंतिम निर्णयकेँ प्रत्यक्ष रूपसँ रद्द नहि कऽ सकैत अछि।
ई कोना लिखल गेल छल?
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ओ जाँच तुलना करैत अछि। संख्यासभ मात्र। ई एहि बातक पुष्टि नहि कऽ सकैत अछि जे दस्तावेज जे कहैत अछि ओ शब्द कहल जाइत अछि-तेँ मूल दस्तावेज हमेशा प्राधिकरण होइत अछि।
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मूल दस्तावेज
भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ
अदालतक आदेश · 29 अक्टूबर 2026
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चर्चा।
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