Wednesday, 30 September 2026 कौन ज़िम्मेदार?
कौन ज़िम्मेदार?KaunZimmedar

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न्यायालयसभ सर्वोच्च न्यायालय

उच्चतम न्यायालयः बी. एन. एस. एस. क अन्तर्गत अभियुक्तकेँ संज्ञानसँ पहिने सुनायल जाय।

मामला एहि बातसँ संबंधित अछि कि सर्वोच्च न्यायालयकेँ कोनो अपराधक संज्ञान लऽ कए आ अभियुक्तक विरुद्ध प्रक्रिया जारी करैत निचला न्यायालयक आदेशकेँ बरकरार रखबाक चाही, ई देखते हुए कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बी. एन. एस. एस.) अपराध के बाद लागू भेल छल।

मामला एहि बातसँ संबंधित अछि कि सर्वोच्च न्यायालयकेँ कोनो अपराधक संज्ञान लैत आ अभियुक्तक विरुद्ध प्रक्रिया जारी करैत निचला न्यायालयक आदेशकेँ बरकरार रखबाक चाही, ई देखते हुए कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बी. एन. एस. एस.) शिकायत दायर भेलाक बाद लेकिन अंतिम आदेश पारित होयबासँ पहिने लागू भऽ गेल छल।

ई कोना चिन्ता करैत अछिः अपीलकर्ताः उमर आ अन्र; उत्तर प्रदेश राज्य आ अन्र; पीठः न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला आ के. विनोद चन्द्रन।

अदालत की फैसला कयलक?

  • अदालत मानलक जे 03.06.2026 क आदेश, जाहिमे प्रथम दृष्टिसँ मामला भेटल आ प्रक्रिया जारी कयल गेल, संज्ञान लेबाक गठन कयलक।
  • न्यायालय निर्णय देलक जे बी. एन. एस. एस. क अन्तर्गत, संज्ञान लेबासँ पहिने अभियुक्तक सुनवार्इ आवश्यक अछि।
  • न्यायालय प्रथम दृष्टिसँ एकटा मामलाक पता लगयबाक आ संज्ञान लेबाक 03.06.2026 आदेशक भागकेँ'समन सरलीकरणकर्ता'तक सीमित कऽ देलक।
  • अपीलार्थी-अभियुक्तकेँ एक मासक भीतर अदालतमे उपस्थित होयबाक निर्देश देल गेल छल।
  • अदालत आदेश देलक जे मामलाक सुनवाई उपस्थितिक तिथि पर या कोनो अन्य दिन कयल जाय यदि शिकायतकर्ता/वकील अनुपस्थित छथि, उचित आदेश पारित करबाक संग।
  • योग्यता पर टिप्पणी के बिना अपील के अनुमति देल गेल छल।
  • कोनो लंबित आवेदन खारिज कऽ देल गेल।

दस्तावेजमे सेहो

  • न्यायालय शिकायतक प्रारंभिक स्वीकृति आ न्यायिक मस्तिष्कक अंतिम अनुप्रयोगक बीच भेद करैत ई निर्धारित कयलक जे बाद वाला बी. एन. एस. एस. लागू भेलाक बाद भेल।
  • अदालत नोट कयलक जे गवाहक जाँच (06.03.2024) आ अंतिम आदेश (03.06.2026) क बीच मामला लगभग दू साल धरि लंबित रहल।
  • निर्णयकेँ गैर-प्रतिवेदन योग्यक रूपमे चिह्नित कयल गेल अछि।

ई कोना लिखल गेल छल?

हमर अपन कंप्यूटर पर चलैत एकटा ए. आई. मॉडल सरकारी दस्तावेज पढ़ैत अछि आ ई सारांश लिखैत अछि। कोनो व्यक्ति एकर जाँच नहि कयने अछि।

आँकडाक जाँच कयल गेल। एहि सारांशमे प्रत्येक संख्या एकटा स्वचालित जाँच द्वारा दस्तावेजमे भेटल छल।

ओ जाँच तुलना करैत अछि। संख्यासभ मात्र। ई एहि बातक पुष्टि नहि कऽ सकैत अछि जे दस्तावेज जे कहैत अछि ओ शब्द कहल जाइत अछि-तेँ मूल दस्तावेज हमेशा प्राधिकरण होइत अछि।

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मूल दस्तावेज

भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ

अदालतक आदेश · 29 सितम्बर 2026

आदेश। 29 सितम्बर 2026 · 0.5 एमबी दस्तावेज खोलू। livelaw.in पर
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चर्चा।

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