Thursday, 22 October 2026 कौन ज़िम्मेदार?
कौन ज़िम्मेदार?KaunZimmedar

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बाजारसभ भारतीय दिवाला आ दिवालियापन बोर्ड

आई. बी. बी. आई. दिवाला पेशेवर पर ₹5 लाख मासिक शुल्क लेबाक लेल जुर्माना लगबैत अछि।

ई भारतीय दिवाला आ दिवालियापन बोर्ड (आईबीबीआई) अनुशासनात्मक समिति द्वारा श्री संजय बुलाकीचंद बोराड नामक दिवाला पेशेवर (आईपी) के संबंधमे जारी एक अनुशासनात्मक आदेश अछि।

नागरिकसभक लेल ई महत्वपूर्ण अछि कारण ई विनियामक मानक स्थापित करैत अछि जे समाधान पेशेवरसभकेँ निगमित दिवाला मामिलामे शुल्क आ अनुमोदनकेँ कोना संभालबाक चाही।

ई कोना चिन्ता करैत अछिः ई आदेश श्री संजय बुलाकीचन्द बोराड (दिवाला पेशेवर), भारतीय दिवाला आ दिवालियापन बोर्ड (नियामक), आ गोल्डन टोबैको लिमिटेडक कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सी. आई. आर. पी.) क हितधारकलोकनिक सम्बन्धमे अछि, जाहिमे ऋणदाता समिति (सी. ओ. सी.) आ न्यायनिर्णायक प्राधिकरण (एन. सी. एल. टी.) शामिल अछि।

बोर्डकेँ की भेटल वा आदेश देल गेल?

  • अनुशासनात्मक समिति (डी. सी.) ने पाया कि श्री संजय बुलाकीचंद बोराड दिवाला आ दिवालियापन संहिता, 2016क धारा 208 (2) (ए) आ (ई) आ सी. आई. आर. पी. विनियमक विनियमन 34बी (2) क उल्लंघन कयलनि।
  • डीसी निर्धारित कयलनि जे आईपी प्रति माह 5 लाख टाका शुल्क लैत अछि, जे संबंधित दावा श्रेणीक लेल निर्धारित न्यूनतम 3 लाख रुपया प्रति माह (500 करोड़ टाका सँ 2,500 करोड़ टाका) सँ बेसी अछि।
  • डी. सी. के अभिनिर्धारित छल जे विनियमन 34बी (2) क अन्तर्गत निर्धारित न्यूनतमसँ बेसी कोनो शुल्कक लेल ऋणदाता समिति (सी. ओ. सी.) सँ पूर्व अनुमोदन आ अभिलिखित कारणक आवश्यकता होइत अछि, जे आई. पी. प्राप्त करबामे विफल रहल।
  • डी. सी. आई. पी. क एहि तर्ककेँ खारिज कऽ देलक जे ओ उच्च शुल्कक हकदार छलाह किएक तँ एकरा पहिल समाधान पेशेवर लेल अनुमोदित कयल गेल छल, ई कहैत जे एहन अनुमोदन स्वचालित रूपसँ उत्तराधिकारीकेँ हस्तांतरित नहि होइत अछि।
  • डी. सी. स्वीकार कयलनि जे अदालतक आदेश (एन. सी. एल. टी. आ एन. सी. एल. ए. टी. सँ) सी. ओ. सी. क बैठककेँ रोकैत छल, मुदा फैसला देलनि जे ई आई. पी. केँ बढ़ाओल गेल शुल्कक लेल पूर्व अनुमोदन लेबय के आवश्यकता सँ बहाना नहि करैत अछि।

दस्तावेजमे सेहो

  • जनवरी 2025 मे एन. सी. एल. ए. टी. क आदेश धरि आईपी अपन नियुक्तिक बाद नौ माससँ बेसी समय धरि कोनो शुल्क नहि लेलक छल।
  • आईपी एन. सी. एल. ए. टी. के एकटा वचन पत्र दाखिल केलक छलै जे अगर पुनर्गठित सी. ओ. सी. द्वारा अनुमोदित नहि होय तऽ शुल्क फेरसँ देल जाय।
  • एहि मामलामे कुल स्वीकार कयल गेल दावा लगभग 1,556 करोड़ टाका छल।

ई कोना लिखल गेल छल?

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ओ जाँच तुलना करैत अछि। संख्यासभ मात्र। ई एहि बातक पुष्टि नहि कऽ सकैत अछि जे दस्तावेज जे कहैत अछि ओ शब्द कहल जाइत अछि-तेँ मूल दस्तावेज हमेशा प्राधिकरण होइत अछि।

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मूल दस्तावेज

भारतीय दिवाला आ दिवालियापन बोर्ड-दिवाला पेशेवर आ अभिकरणसभक विरुद्ध अनुशासनात्मक आदेश

अनुशासनात्मक आदेश · सन्दर्भ 5292a90540baa977 · 21 अक्टूबर 2026

सरकारी दस्तावेज 21 अक्टूबर 2026 · 0.3 एमबी दस्तावेज खोलू। ibbi.gov.in पर
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