Monday, 19 October 2026 कौन ज़िम्मेदार?
कौन ज़िम्मेदार?KaunZimmedar

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न्यायालयसभ सर्वोच्च न्यायालय

सुप्रीम कोर्टः मतदाता गलत चुनाव शपथपत्रक लेल निजी शिकायत दर्ज करा सकैत छथि

ई मामला एहि बातसँ संबंधित अछि कि की कोनो निजी व्यक्ति (मतदाता) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951क धारा 125-ए के तहत अपन चुनाव हलफनामेमे गलत खुलासा करबाक लेल कोनो निर्वाचित उम्मीदवारक खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकैत अछि।

ई मामला एहि बातसँ संबंधित अछि कि की कोनो निजी व्यक्ति (मतदाता) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951क धारा 125-ए के तहत अपन चुनाव हलफनामेमे गलत खुलासा करबाक लेल कोनो निर्वाचित उम्मीदवारक खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकैत अछि, या यदि एहन शिकायत दंड प्रक्रिया संहिताक धारा 195 (1) के तहत लोक सेवकों तक सीमित अछि।

ई कोना चिन्ता करैत अछिः अपीलकर्ताः श्री. राजकुमार मडकी; प्रतिवादीः डॉ. शैलेन्द्र बेलदाले (कर्नाटक विधानसभाक सदस्य); पीठः न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता आ न्यायमूर्ति शील नागू।

अदालत की फैसला कयलक?

  • न्यायालयक निर्णय छल जे एकटा निजी व्यक्ति आर. ओ. पी. अधिनियमक धारा 125-ए क अन्तर्गत कोनो अपराधक लेल सी. आर. पी. सी. क धारा 200क अन्तर्गत शिकायत दर्ज कऽ सकैत अछि, किएक तँ सी. आर. पी. सी. क धारा 195 (1) एहन निजी शिकायतसभ पर रोक नहि लगबैत अछि।
  • न्यायालयकेँ पता चलल जे उच्च न्यायालयक एहि निर्णयमे त्रुटि छल जे केवल चुनाव आयोग या लोक सेवक एहि तरहक शिकायत दायर कऽ सकैत अछि।
  • न्यायालय एहि मामलामे विशिष्ट शिकायतकेँ रद्द करबाक उच्च न्यायालयक निर्णयकेँ बरकरार रखलक, मुदा अलग-अलग आधारपरः प्रत्यर्थी द्वारा मिथ्या निवास घोषणाक आरोपकेँ प्रभावी रूपसँ खारिज कऽ देल गेल, जाहिसँ दोषसिद्धि दूरगामी भऽ गेल आ अगिला कार्यवाही व्यर्थ भऽ गेल।
  • अपीलक निपटारा कऽ देल गेल आ पक्षकारसभकेँ अपन खर्च स्वयं वहन करबाक निर्देश देल गेल।

दस्तावेजमे सेहो

  • न्यायालय नोट कयलक जे आर. ओ. पी. अधिनियमक धारा 125-ए 2002मे जोड़ी गेल छल, आ 2006मे दंड प्रक्रिया संहिताक धारा 195मे बिना धारा 125-एकेँ शामिल कयल गेल छल, जे निजी शिकायतसभकेँ प्रतिबंधित करबाक लेल जानबूझकर विधायी चूककेँ इंगित करैत अछि।
  • न्यायालय कहलनि जे चुनाव आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देश वा प्रेस नोट कानूनक व्याख्यामे न्यायालयकेँ बाध्य नहि करैत अछि।
  • न्यायालयक मत छल जे अभिलेख पर दस्तावेजसभक प्रकृतिक कारणेँ विशिष्ट मामलामे दोषसिद्धिक संभावना बहुत कम छल।

ई कोना लिखल गेल छल?

हमर अपन कंप्यूटर पर चलैत एकटा ए. आई. मॉडल सरकारी दस्तावेज पढ़ैत अछि आ ई सारांश लिखैत अछि। कोनो व्यक्ति एकर जाँच नहि कयने अछि।

आँकडाक जाँच कयल गेल। एहि सारांशमे प्रत्येक संख्या एकटा स्वचालित जाँच द्वारा दस्तावेजमे भेटल छल।

ओ जाँच तुलना करैत अछि। संख्यासभ मात्र। ई एहि बातक पुष्टि नहि कऽ सकैत अछि जे दस्तावेज जे कहैत अछि ओ शब्द कहल जाइत अछि-तेँ मूल दस्तावेज हमेशा प्राधिकरण होइत अछि।

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मूल दस्तावेज

भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ

अदालतक आदेश · 19 अक्टूबर 2026

आदेश। 19 अक्टूबर 2026 · 0.3 एमबी दस्तावेज खोलू। livelaw.in पर
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