न्यायालयसभ सर्वोच्च न्यायालय
उच्चतम न्यायालय पक्ष द्वारा दाखिल कयल गेल संकलनमे कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा उत्पन्न नकली निर्णयकेँ हरी झंडी दिखबैत अछि।
एहि मामलामे दिवाला आ दिवालियापन संहिता, 2016क अन्तर्गत दूटा वैधानिक अपील शामिल अछि, जाहिमे जी. एस. टी. ए. ए. डी. होटल्स प्राइवेट लिमिटेड आ नियो कैप्रिकॉर्न प्लाजा प्राइवेट लिमिटेडक विरुद्ध कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सी. आई. आर. पी.) क प्रवेशकेँ चुनौती देल गेल अछि।
एहि मामलामे दिवाला आ दिवालियापन संहिता, 2016क अन्तर्गत दूटा वैधानिक अपील शामिल अछि, जाहिमे जी. एस. टी. ए. ए. डी. होटल्स प्राइवेट लिमिटेड आ नियो कैप्रिकॉर्न प्लाजा प्राइवेट लिमिटेडक विरुद्ध कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सी. आई. आर. पी.) क प्रवेशकेँ चुनौती देल गेल अछि। मुख्य मुद्दा ई अछि कि वित्तीय ऋणदाता, ओमकारा एसेट्स रिकंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दावा कयल गेल वित्तीय ऋण चूकमे छल आ की दिवाला याचिका सभक स्वीकार कानूनी रूपसँ उचित छल।
ई कोना चिन्ता करैत अछिः अपीलकर्ताः दीपक रहेजा आ दोसर; उत्तरदाताः ओमकारा एसेट्स रिकन्स्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड आ दोसर; पीठः न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह।
अदालत की फैसला कयलक?
- न्यायालय एकटा सामान्य निर्णय द्वारा अपीलसभक निपटारा कयलक।
- न्यायालय राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एन. सी. एल. टी.) आ राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एन. सी. एल. ए. टी.) क आदेशक पुष्टि कयलक जे दिवाला याचिका सभकेँ स्वीकार कयलक।
- न्यायालय एहि निष्कर्षकेँ बरकरार रखलक जे वैधानिक सीमा सँ बेसी वित्तीय ऋण मौजूद छल आ चूकमे छल।
- अदालत नकद प्रबंधन समझौता (सी. एम. ए.), ऋण सेवा आरक्षित खाता (डी. एस. आर. ए.), आ पूर्वनिर्धारित राशिक संगणनक संबंधमे अपीलकर्ताक तर्ककेँ खारिज कऽ देलक।
- न्यायालयक निर्णय छल जे ऋणकेँ वापस लेबाक अधिकार अर्जित भेल अछि आ अपीलार्थी ऋण शोधन क्षमता प्रदर्शित करबामे विफल रहल छथि।
दस्तावेजमे सेहो
- निर्णयकेँ'रिपोर्टेबल'के रूपमे चिन्हित कयल गेल अछि।
- न्यायालय नोट कयलक जे अपीलीय न्यायाधिकरण पहिने एहि मामलाकेँ नव विचारक लेल भेज देने छल, मुदा न्यायनिर्णायक प्राधिकरण पक्षकारसभकेँ सुनलाक बाद फेरसँ याचिका सभकेँ स्वीकार कयलक।
- न्यायालयक अवलोकन छल जे अपीलकर्ताक अपन समीक्षा रिपोर्टमे पूर्वनिर्धारित राशिक गणनामे कोनो दोष नहि भेटल अछि, मात्र ब्याज दर पर प्रश्न उठल अछि।
ई कोना लिखल गेल छल?
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ओ जाँच तुलना करैत अछि। संख्यासभ मात्र। ई एहि बातक पुष्टि नहि कऽ सकैत अछि जे दस्तावेज जे कहैत अछि ओ शब्द कहल जाइत अछि-तेँ मूल दस्तावेज हमेशा प्राधिकरण होइत अछि।
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मूल दस्तावेज
भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ
अदालतक आदेश · 15 अक्टूबर 2026
एकरा एतऽ पढ़ू।
चर्चा।
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