Tuesday, 6 October 2026 कौन ज़िम्मेदार?
कौन ज़िम्मेदार?KaunZimmedar

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न्यायालयसभ सर्वोच्च न्यायालय

सर्वोच्च न्यायालय बलात्कारक मामलाकेँ रद्द कयलक, विवाहकेँ बाध्य करबाक लेल अभियोजन अभियोजनक उपयोग पर रोक लगौलनि

ई मामला एकटा आपराधिक अपीलसँ सम्बन्धित अछि जतय उच्चतम न्यायालय अपीलार्थी मार्तण्डा सिंहक विरुद्ध दायर बलात्कारक मामलाकेँ रद्द कऽ देलक, जाहिमे आरोप लगाओल गेल छल जे ओ तीन वर्षक बाद विवाहक झूठा वादोंक तहत दोसर प्रतिवादीक यौन शोषण कयलक।

ई मामला एकटा आपराधिक अपीलसँ सम्बन्धित अछि जतय उच्चतम न्यायालय अपीलार्थी मार्तण्डा सिंहक विरुद्ध दायर बलात्कारक मामलाकेँ खारिज कऽ देलक, जाहिमे आरोप लगाओल गेल छल जे ओ तीन वर्षक सहमतिपूर्ण सम्बन्धक बाद विवाहक झूठा वादोंक तहत दोसर प्रतिवादीक यौन शोषण कयलक।

ई कोना चिन्ता करैत अछिः मामला अपीलार्थी (मार्तण्ड सिंह) आ प्रतिवादी (छत्तीसगढ़ राज्य आ दोसर प्रतिवादी/शिकायतकर्ता) सँ सम्बन्धित अछि। पीठमे न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला आ के. विनोद चंद्रन शामिल छलाह।

अदालत की फैसला कयलक?

  • अपीलक लेल अनुमति देल गेल अछि।
  • न्यायालयकेँ अपीलार्थी पर कोनो आपराधिक दोष नहि भेटल, ई निर्धारित करैत जे शारीरिक सम्बन्धक लेल सहमति जबरदस्ती नहि कयल गेल छल वा गलत प्रस्तुतिक माध्यमसँ प्राप्त नहि कयल गेल छल।
  • आरोप पत्र (2025क आरोप पत्र No.199) आर. डी. के. दिल गेल हल।
  • आतिकत सतयार न्यायधीश (एफ़. टी. सी.), बिलास्पूर (सी. जी.) क समाक 2025क लम्बित सतार मेला No.216 केँ बण्ड करबक देश देल गेल छ्ल।
  • अपीलकेँ अनुमति देल गेल।
  • कोनो लंबित आवेदन खारिज कऽ देल गेल।

दस्तावेजमे सेहो

  • अदालत नोट कयलक जे दोसर प्रतिवादी पेश होयबाक बावजुद अदालतमे उपस्थित नहि भेल।
  • न्यायालयक मत छल जे आपराधिक अभियोजनक धमकीमे महिला थाना परामर्श केन्द्रमे देल गेल विवाहक वचन अप्रवर्तनीय अछि आ एहि सन्दर्भमे विवाह करबाक वैध वचन नहि अछि।
  • न्यायालय एहि बात पर जोर देलक जे आपराधिक अभियोजनकेँ विवाहकेँ मजबूर करबाक लेल'मजबूत हथ्यार रणनीति'क रूपमे उपयोग नहि कयल जा सकैत अछि।

ई कोना लिखल गेल छल?

हमर अपन कंप्यूटर पर चलैत एकटा ए. आई. मॉडल सरकारी दस्तावेज पढ़ैत अछि आ ई सारांश लिखैत अछि। कोनो व्यक्ति एकर जाँच नहि कयने अछि।

आँकडाक जाँच कयल गेल। एहि सारांशमे प्रत्येक संख्या एकटा स्वचालित जाँच द्वारा दस्तावेजमे भेटल छल।

ओ जाँच तुलना करैत अछि। संख्यासभ मात्र। ई एहि बातक पुष्टि नहि कऽ सकैत अछि जे दस्तावेज जे कहैत अछि ओ शब्द कहल जाइत अछि-तेँ मूल दस्तावेज हमेशा प्राधिकरण होइत अछि।

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मूल दस्तावेज

भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ

अदालतक आदेश रेफ. एसएलपी) उच्चतम न्यायालयक समक्ष Court.The सर्वोच्च न्यायालय दीपक गुलाटी बनाम 5 अक्टूबर 2026क राज्यकेँ दोहरौलनि।

आदेश। 5 अक्टूबर 2026 · 0.1 एमबी दस्तावेज खोलू। livelaw.in पर
एकरा एतऽ पढ़ू।

चर्चा।

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