Sunday, 8 November 2026 कौन ज़िम्मेदार?
कौन ज़िम्मेदार?KaunZimmedar

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न्यायालयसभ सर्वोच्च न्यायालय

निविदा प्रस्तावक अंतर-अधिनिर्णयकेँ चुनौती देनेवाली जनहित याचिका पर उच्चतम न्यायालय नाराज़

ई मामला उच्च न्यायालयक ओहि आदेशकेँ चुनौती दैत अछि जाहिमे सड़क निर्माण निर्णयकेँ रद्द कऽ देल गेल छल आ फेरसँ निविदाक निर्देश देल गेल छल, जाहिमे उच्चतम न्यायालय एहि बातक जाँच करैत अछि कि निविदाक एहन अंतर-तुलनात्मक मूल्यांकन सार्वजनिक स्तर पर उठायल जा सकैत अछि कि नहि।

ई मामला उच्च न्यायालयक ओहि आदेशकेँ चुनौती दैत अछि जाहिमे सड़क निर्माणक निर्णयकेँ रद्द कऽ देल गेल छल आ फेरसँ निविदाक निर्देश देल गेल छल, जाहिमे उच्चतम न्यायालय एहि बातक जाँच करैत अछि कि निविदाक एहन अंतर-तुलनात्मक मूल्यांकन जनहित याचिका (पी. आई. एल.) मे उठायल जा सकैत अछि कि नहि।

ई कोना चिन्ता करैत अछिः अपीलकर्ताः ओ. पी. मेहता; उत्तरदाताः मोहिंदर कल्टा आ अन्य; पीठः न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता आ शील नागू।

अदालत की फैसला कयलक?

  • न्यायालय निविदा बोलीक तुलनात्मक मूल्यांकन लेल जनहित याचिकाक उपयोग करय पर आपत्ति व्यक्त कयलक।
  • अदालत अपीलार्थीकेँ 15.03.2024 पर प्रचलित दर पर सड़क निर्माण कार्य पूरा करबाक लेल तीन मासक अवधि बढ़ा देलक।
  • आधिकारिक उत्तरदातासभकेँ निष्पादित काजक गुणवत्ताक सत्यापन करबाक निर्देश देल जाइत अछि।
  • यदि काज तीन मासक भीतर पूरा नहि होइत अछि तँ आधिकारिक उत्तरदाताकेँ प्रचलित बाजार दर पर काजकेँ फेरसँ निविदा देबाक निर्देश देल जाइत अछि।
  • तृतीय-पक्ष अधिकारक निर्माणकेँ रोकैत 07.03.2025 क अंतरिम आदेशकेँ एहि आदेशमे दर्शायल सीमा धरि संशोधित कयल गेल छल।
  • मामला दिसंबर 2026 के पहिल सप्ताह के लेल सूचीबद्ध अछि जाहि मे अपीलार्थी अनुपालन रिपोर्ट जमा कऽ सकय।

दस्तावेजमे सेहो

  • अदालत नोट कयलक जे जनहित याचिका याचिकाकर्ता असफल बोलीदारक अहंकार छल जे पहिने सफल बोलीदारक खिलाफ शिकायत वापस लऽ लेने छल।
  • अदालत नोट कयलक जे काजक लागत (23 करोड़ टाका) एहन परिमाणक नहि छल जे जनहित याचिका मे सार्वजनिक संसाधनक अपव्ययक याचिका के अनुमति दे।
  • आई देश हिमाचल प्रदेश राज्य सरकार सरकार दिल्ली खेल 2026के सिविल अपना No.12969 के नियंत्रीयत कराती है।

ई कोना लिखल गेल छल?

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ओ जाँच तुलना करैत अछि। संख्यासभ मात्र। ई एहि बातक पुष्टि नहि कऽ सकैत अछि जे दस्तावेज जे कहैत अछि ओ शब्द कहल जाइत अछि-तेँ मूल दस्तावेज हमेशा प्राधिकरण होइत अछि।

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मूल दस्तावेज

भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ

अदालतक आदेश · 23 सितम्बर 2026

आदेश। 23 सितम्बर 2026 · 0.20 एमबी दस्तावेज खोलू। livelaw.in पर
एकरा एतऽ पढ़ू।

चर्चा।

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