सर्वोच्च न्यायालय हत्याक मामलामे दू गोटेकेँ बरी करबाक याचिका खारिज कयलक
एहि मामलामे हिमाचल प्रदेश राज्य वरिन्दर वर्मा आ देव राजकेँ बरी करबाक विरुद्ध अपील करैत अछि, जकरा आईपीसीक धारा 302/34 क अन्तर्गत हत्याक दोषी ठहराओल गेल छल। मुख्य मुद्दा ई अछि जे प्रत्यक्षदर्शी आ संदिग्ध साक्ष्यक अभावकेँ देखते हुए अभियुक्तक विरुद्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्य दोषसिद्धिकेँ कायम रखबाक लेल पर्याप्त छल कि नहि।
यचिकाकारताः हिमाचल देश राज; प्रतिवादीः वरिंदर Verma@Jatti & आनर; पीथः नैयामूरती मनोज मिश्रा आ विजय बिसनोई
- वरिन्दर वर्मा आ देव राजकेँ बरी करबाक खिलाफ अपील खारिज कऽ देल गेल।
- न्यायालय प्रत्यक्षदर्शीक कमी, साक्ष्यक संदिग्ध बरामदगी, आ गवाह पीडब्लू-3 द्वारा खुलासा मे देरी के कारण अभियोजन पक्ष के साक्ष्य के अविश्वसनीय पाओल।
- न्यायालयक निर्णय छल जे परिस्थितिजन्य साक्ष्य निर्णायक रूपसँ अपराधकेँ स्थापित नहि करैत अछि आ अभियुक्त सन्देहक लाभक हकदार अछि।
- डंडा आ खूनसँ दागायल कपड़ाक बरामदगीकेँ स्टेज-मैनेज्ड आ कृत्रिम मानल गेल।
- लंबित आवेदनक निपटारा कऽ देल गेल।
ए. आई. द्वारा दस्तावेजसँ लिखल गेल आ ओकर विरुद्ध जाँच कयल गेल। नीचाँ देल गेल मूल आधिकारिक अछि।
मूल दस्तावेज
दस्तावेजक विवरण
| आधिकारिक शीर्षक | 'गवाह द्वारा विलंबित प्रकटीकरण साक्ष्य मूल्यकेँ कम करैत अछि', सर्वोच्च न्यायालय हत्याक मामलामे दू गोटेकेँ बरी करबाक निर्णयकेँ समर्थन देलक |
| स्रोत निकाय | भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ |
| संदर्भ संख्या | — |
| स्थिति | बन्द भऽ गेल। (आदेश) |
| वर्ष। | 2026 |
| बन्द करबाक तिथि | — |
| दस्तावेजसभ | 1 |