Sunday, 8 November 2026 कौन ज़िम्मेदार?
कौन ज़िम्मेदार?KaunZimmedar

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न्यायालयसभ सर्वोच्च न्यायालय

उच्चतम न्यायालयः अप्रवर्तित 2002 नियमसभक अन्तर्गत कोनो निहित पदोन्नति अधिकार नहि अछि।

मामला एहि बातसँ संबंधित अछि कि कार्यपालक आधार पर काज करैवला कर्मचारी पहिनेक नियमक तहत'राजभाषा अधिकारी'के पद पर पदोन्नतिक हकदार छथि या 2005क नियमक तहत प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा सँ गुजरबाक आवश्यकता अछि।

सर्वोच्च न्यायालय निर्धारित कयलक जे ओकर कोन पूर्व निर्णय (मिश्री लाल वा मेडिनी सी) एहि उत्तरदातासभक विशिष्ट तथ्यकेँ नियंत्रित करैत अछि।

ई कोना चिन्ता करैत अछिः अपीलकर्ताः भारत संचार निगम लिमिटेड (बी. एस. एन. एल.) आ अन्य; उत्तरदाताः जी. एन. मणि रविंदर आ अन्य (रिट याचिकाकर्ता); पीठः न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा।

अदालत की फैसला कयलक?

  • न्यायालय अपील करबाक अनुमति देलक।
  • न्यायालय प्रत्यर्थीक मामला आ मिश्री लाल (2011) मे स्थापित उदाहरणक बीचक अंतरक विश्लेषण कयलक।
  • न्यायालय नोट कयलक जे उत्तरदातासभकेँ कखनहु नियमित रूपसँ पदोन्नत वा नियुक्त नहि कयल गेल छल, बल्कि ओ कार्यपालक आधार पर काज कऽ रहल छलाह।
  • अदालत मिश्री लालकेँ उद्धृत करैत कहैत अछि जे कार्यपालक आधार पर काज करैवला व्यक्तिकेँ 2002क नियमक अन्तर्गत पदोन्नतिक लेल निहित अधिकार नहि छैक, जे कहियो लागू नहि भेल छल।
  • न्यायालयक मत अछि जे 2005क नियम कार्यकारी पदक लेल भर्तीक तरीकाकेँ सीमित आंतरिक प्रतियोगी परीक्षामे बदलि देलक।
  • न्यायालय एहि निष्कर्ष पर पहुँचल जे कार्यपालक कर्मचारीक पदोन्नतिक बदला प्रतियोगी परीक्षाक माध्यमसँ पद भरिबाक नीतिमे परिवर्तन गैरकानूनी नहि छल।

दस्तावेजमे सेहो

  • न्यायालय वर्तमान मामलाकेँ मेडिनी सी. (2022) सँ अलग करैत नोट कयलक जे मेडिनी सी. मे उम्मीदवारसभकेँ 2002क नियमसँ पहिने आधिकारिक या तदर्थ आधार पर पदोन्नत कयल गेल छल, जखन कि वर्तमान मामलामे उत्तरदातासभकेँ कखनो नियमित रूपसँ पदोन्नत नहि कयल गेल छल।
  • न्यायालय एहि बातक पुष्टि कयलक जे 2002क नियमकेँ कहियो लागू नहि कयल गेल छल, जकर अर्थ अछि जे उत्तरदातासभ लेल ओकर अधीन कोनो निहित अधिकार अर्जित नहि भेल छल।
  • न्यायालयक निर्णय छल जे 2005क नियम, जे प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाकेँ अनिवार्य करैत छल, स्थानीय अधिकारीक लेल पूर्ववर्ती प्रशासनिक निर्देशकेँ वैध रूपसँ हटा देलक।

ई कोना लिखल गेल छल?

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ओ जाँच तुलना करैत अछि। संख्यासभ मात्र। ई एहि बातक पुष्टि नहि कऽ सकैत अछि जे दस्तावेज जे कहैत अछि ओ शब्द कहल जाइत अछि-तेँ मूल दस्तावेज हमेशा प्राधिकरण होइत अछि।

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मूल दस्तावेज

भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ

अदालतक आदेश · 17 सितम्बर 2026

आदेश। 17 सितम्बर 2026 · 0.3 एमबी दस्तावेज खोलू। livelaw.in पर
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