न्यायालयसभ सर्वोच्च न्यायालय
कारमे सीट बेल्टः उच्चतम न्यायालय केंद्रकेँ सख्त प्रवर्तनक लेल सुझाव पर विचार करबाक आदेश देलक
एहि मामलामे एक मधुमेह विशेषज्ञ द्वारा दायर एक जनहित याचिका शामिल अछि जाहिमे अनिवार्य सीट बेल्ट, बाल संयम, आ वाहनमे प्राथमिक चिकित्सा किटक उपयोगक प्रभावी प्रवर्तनक लेल निर्देशक मांग कयल गेल अछि।
न्यायालय वर्तमान सुरक्षा कानूनक अनुपालनक मुद्दा आ याचिकाकर्ता के पूर्व अभ्यावेदन पर अधिकारी के प्रतिक्रिया के अभाव के संबोधित केलक।
ई कोना चिन्ता करैत अछिः याचिकाकर्ताः जोथीदेव केशवदेव; प्रतिवादीः भारत संघ; पीठः माननीय मुख्य न्यायाधीश, माननीय न्यायमूर्ति श्री जोयमाल्या बागची, माननीय श्रीमती न्यायमूर्ति वी. मोहना।
अदालत की फैसला कयलक?
- दाखिल करबामे भेल विलम्बकेँ माफ कऽ देल गेल।
- रिट याचिका का निपटारा कऽ देल गेल।
- याचिकाकर्ता केँ याचिकाक एकटा प्रति भारतक सड़क परिवहन आ राजमार्ग मंत्रालयकेँ पठयबाक स्वतंत्रता देल गेल छल।
- मंत्रालयकेँ याचिकाकर्ता के सिफारिश/सुझाव पर सड़क सुरक्षा उपाय के हिस्सा के रूप मे विचार करै के निर्देश देल गेल छल।
- सभ लंबित आवेदनक निपटारा कऽ देल गेल।
दस्तावेजमे सेहो
- न्यायालयक मत छल जे न्यायिक आदेशक माध्यमसँ अनिवार्य कानूनी प्रावधानकेँ दोहराबयसँ ओकर प्रवर्तनमे सहायता नहि होयत।
- न्यायालय कानून प्रवर्तन अभिकरणसभक गैर-अनुपालन आ विफलता के कानून आ व्यवस्था आ यातायात अनुशासन के रखरखाव के सवाल के रूप मे वर्णित केलक।
- याचिकाकर्ता पहिने प्रतिवादीकेँ 16.02.2026 पर निवेदन पठौलनि मुदा कोनो उत्तर नहि भेटल।
ई कोना लिखल गेल छल?
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ओ जाँच तुलना करैत अछि। संख्यासभ मात्र। ई एहि बातक पुष्टि नहि कऽ सकैत अछि जे दस्तावेज जे कहैत अछि ओ शब्द कहल जाइत अछि-तेँ मूल दस्तावेज हमेशा प्राधिकरण होइत अछि।
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मूल दस्तावेज
भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ
अदालतक आदेश · 16 सितम्बर 2026
एकरा एतऽ पढ़ू।
चर्चा।
एहि दस्तावेज पर एखन धरि कोनो चर्चा नहि भेल अछि।