Sunday, 8 November 2026 कौन ज़िम्मेदार?
कौन ज़िम्मेदार?KaunZimmedar

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न्यायालयसभ सर्वोच्च न्यायालय

उच्चतम न्यायालय 117 पृष्ठक निर्णयमे उच्च न्यायालय द्वारा पुनरीक्षण शक्तिक नियमित उपयोगक संकेत देलक।

ई मामला माधव विदर्भ एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर दूटा दीवानी अपीलसँ सम्बन्धित अछि जे उच्च न्यायालयक आदेशकेँ चुनौती दैत अछि जे वादीक दावाकेँ सीमा पर खारिज कऽ देलक छल, जाहिमे उच्चतम न्यायालय पुनरीक्षणक उचित दायरा पर ध्यान केन्द्रित कयलक।

ई मामला माधव विदर्भ एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर दूटा दीवानी अपीलसँ सम्बन्धित अछि जे उच्च न्यायालयक आदेशकेँ चुनौती दैत अछि जे वादीक दावाकेँ सीमा पर खारिज कऽ देलक छल, जाहिमे सर्वोच्च न्यायालय सिविल प्रक्रिया संहिताक धारा 115क तहत पुनरीक्षण क्षेत्राधिकारक उचित दायरे पर ध्यान केंद्रित कयलक।

ई कोना चिन्ता करैत अछिः अपीलकर्ताः माधव विदर्भ एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड; उत्तरदाताः प्रह्लाद कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड & ओआरएस. आ श्री सावन नन्दकुमार भतेवाड़ा & ओआरएस; पीठः न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता।

अदालत की फैसला कयलक?

  • न्यायालय अपील करबाक अनुमति देलक।
  • न्यायालय नोट कयलक जे उच्च न्यायालयक निर्णय आदेश VII, नियम 11, सी. पी. सी. क अन्तर्गत आवेदनकेँ अस्वीकार करबामे निचली न्यायालय द्वारा कोनो विशिष्ट त्रुटिक पहचान करबामे विफल रहल।
  • न्यायालय दोहरौलनि जे धारा 115, सी. पी. सी. क अन्तर्गत पुनरीक्षण अधिकारिता कानून द्वारा निहित अधिकारिता के प्रयोग, निहित अधिकारिता के प्रयोग मे विफलता, या भौतिक अनियमितता के संग अधिकारिता के अवैध प्रयोग सँ जुड़ल मामला तक सीमित अछि।
  • न्यायालय अपीलक मूल अधिकार आ पुनरीक्षणक पर्यवेक्षी शक्तिक बीच भेद करैत ई नोट कयलक जे पुनरीक्षण वादीकेँ मूल अधिकार प्रदान नहि करैत अछि।
  • न्यायालय प्रथम विधि आयोग (1958) क 14म रिपोर्टक सन्दर्भ देलक जाहिमे अधीनस्थ अदालतक कार्यवाहीमे अनुचित व्यवधानकेँ रोकबाक लेल नियम-निषेध जारी करबामे सख्त जाँच आ पुनरीक्षण आवेदनमे रोक आदेशक आवश्यकताक उल्लेख कयल गेल छल।

दस्तावेजमे सेहो

  • न्यायालयक निरीक्षण छल जे 117 पृष्ठक विवादित उच्च न्यायालयक निर्णयमे एहि विषय पर कोनो चर्चा नहि छल जे विचारण न्यायालय कोना गलती कयलक, जकरा न्यायालय एहि सन्दर्भमे एकटा'अद्वितीय मामला'बतौलनि।
  • न्यायालय एहि बात पर जोर देलक जे उच्च न्यायालय पुनरीक्षण आवेदनकेँ अनुमति देलक जकर परिणामस्वरूप उत्तरदातासभक विरुद्ध वाद खारिज भऽ गेल।
  • न्यायालय ऐतिहासिक कानूनी टिप्पणी (प्रथम विधि आयोग, 1958) क हवाला दैत पुनरीक्षण आवेदनक'प्रशासनमे ढिलाई'आ नियमित रूपसँ रोकक आदेश देबाक आलोचना कयलक।

ई कोना लिखल गेल छल?

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ओ जाँच तुलना करैत अछि। संख्यासभ मात्र। ई एहि बातक पुष्टि नहि कऽ सकैत अछि जे दस्तावेज जे कहैत अछि ओ शब्द कहल जाइत अछि-तेँ मूल दस्तावेज हमेशा प्राधिकरण होइत अछि।

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मूल दस्तावेज

भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ

अदालतक आदेश · 31 अगस्त 2026

आदेश। 31 अगस्त 2026 · 0.20 एमबी दस्तावेज खोलू। livelaw.in पर
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