Sunday, 8 November 2026 कौन ज़िम्मेदार?
कौन ज़िम्मेदार?KaunZimmedar

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न्यायालयसभ सर्वोच्च न्यायालय

उच्चतम न्यायालयः एस. सी. एन. केँ धारा 74 लागू करबाक लेल धोखाधड़ी या छिपयबाक पक्षकेँ निर्दिष्ट करबाक चाही

मामला एहि बातसँ संबंधित अछि कि मध्य प्रदेश कर विभाग द्वारा निर्धारण वर्ष 2018-19 लेल जारी कारण दर्शाउ नोटिस (SCN) के CGST अधिनियमक धारा 74क तहत कायम राखल जा सकैत अछि, जे सी. जी. एस. टी. अधिनियमसँ संबंधित मामिलाक लेल विस्तारित सीमा अवधिक अनुमति दैत अछि।

मामला एहि बातसँ संबंधित अछि कि मध्य प्रदेश कर विभाग द्वारा निर्धारण वर्ष 2018-19 क लेल जारी कारण दर्शाउ नोटिस (एस. सी. एन.) के सी. जी. एस. टी. अधिनियमक धारा 74क तहत कायम राखल जा सकैत अछि, जे धोखाधड़ी या छिपाइसँ जुड़ल मामिलाक लेल विस्तारित सीमा अवधिक अनुमति दैत अछि, या यदि ई धारा 73क तहत समय-प्रतिबंधित अछि।

ई कोना चिन्ता करैत अछिः अपीलकर्ताः मेसर्स जी. आर. इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड रतलाम; उत्तरदाताः मध्य प्रदेश राज्य आ अन्य; पीठः न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला आ न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन।

अदालत की फैसला कयलक?

  • न्यायालयक अभिनिर्धारित छल जे धारा 74क अन्तर्गत एकटा नोटिसमे अदालतमे दाखिल प्रति-शपथपत्र पर भरोसा करबाक बजाय, विशेष रूपसँ सूचनाक भीतर धोखाधड़ी या छिपयबाक पक्षकेँ बताओल जाय।
  • न्यायालय निर्धारित कयलक जे एस. सी. एन. दिनांक 13.06.2025 धारा 73क अन्तर्गत समय-प्रतिबन्धित छल, किएक तँ विस्तारित सीमा अवधि (महामारी बहिष्करणक लेखा) 28.02.2025 पर समाप्त भऽ गेल छल।
  • न्यायालय उच्च न्यायालय आ एस. सी. एन. क विवादित आदेशकेँ खारिज कऽ देलक।
  • न्यायालय प्रत्यर्थी-राज्यकेँ चुनौती देल गेल एस. सी. एन. क अनुसरणमे आगू कोनो कार्यवाही करबासँ बचबाक निर्देश देलक।
  • दीवानी अपीलकेँ अनुमति देल गेल।
  • कोनो लंबित आवेदनक निपटारा कऽ देल गेल।

दस्तावेजमे सेहो

  • न्यायालय एहि सिद्धान्तक पालन करैत नोटिसकेँ उचित ठहरयबाक लेल राज्य द्वारा दाखिल जवाबी-शपथ-पत्र पर विचार करबासँ मना कऽ देलक जे वैधता आवश्यकता सभ नोटिस या आदेशमे निहित रहबाक चाही।
  • न्यायालय नोट कयलक जे'धोखाधड़ी या तथ्यकेँ छिपायब'वाक्यांशमे'वा'शब्दक प्रयोगसँ सङ्केत भेटैत अछि जे निर्धारण अधिकारी विशिष्ट आधारक बारे मे निश्चित नहि छलाह, आ विशिष्ट पक्षकेँ सूचीबद्ध कयलाक बिना वैधानिक शब्दक यांत्रिक उपयोग अपर्याप्त अछि।
  • सीमा अवधिक गणनामे महामारीक संबंधमे उच्चतम न्यायालयक पूर्व आदेशक अनुसार 1 वर्ष आ 2 मास (15.03.2020 सँ 28.02.2022 धरि) के बहिष्करण शामिल छल।

ई कोना लिखल गेल छल?

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मूल दस्तावेज

भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ

अदालतक आदेश · 24 अगस्त 2026

आदेश। 24 अगस्त 2026 · 0.1 एमबी दस्तावेज खोलू। livelaw.in पर
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