एन. जी. टी. क दायित्वकेँ दरकिनार कऽ उच्चतम न्यायालय'आर्ट ऑफ लिविंग'केँ 5 करोड़ टाका फेरसँ देबाक आदेश देलक।
एहि मामलामे राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एन. जी. टी.) क आदेशक विरुद्ध व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया द्वारा अपील शामिल अछि जाहिमे विश्व संस्कृति महोत्सवक कारण यमुना नदीक बाढ़क मैदानकेँ पर्यावरणीय नुकसानक लेल इकाईकेँ उत्तरदायी ठहरायल गेल छल। सर्वोच्च न्यायालय एन. जी. टी. क दायित्वक निष्कर्षकेँ खारिज कऽ दैत अछि आ भुगतान कयल गेल पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के प्रतिदानक निर्देश दैत अछि।
अपीलकर्ताः व्यक्ति विकास केन्द्र भारत (आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटरक नामसँ सेहो जानल जाइत अछि); उत्तरदाताः मनोज मिश्रा (मृत) आ अन्य; पीठः न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा।
- उच्चतम न्यायालय एन. जी. टी. क दिनांकित 07.12.2017 आदेशकेँ खारिज कऽ दैत अछि जाहिमे अपीलार्थीकेँ यमुना नदी मैदानकेँ भेल क्षतिक लेल उत्तरदायी ठहरायल गेल छल।
- अदालत अपीलार्थीकेँ 5 करोड़ टाका फेरसँ देबाक निर्देश दैत अछि।
- अदालत नोट करैत अछि जे एनजीटी पहिने 5 करोड़ रुपयाक एहि पर्यावरणीय मुआवजक भुगतानक अधीन एहि आयोजनकेँ अनुमति देने छल।
ए. आई. द्वारा दस्तावेजसँ लिखल गेल आ ओकर विरुद्ध जाँच कयल गेल। नीचाँ देल गेल मूल आधिकारिक अछि।
मूल दस्तावेज
दस्तावेजक विवरण
| आधिकारिक शीर्षक | सुप्रीम कोर्ट ने यमुना नदी के मैदान के नुकसान के लिए'आर्ट ऑफ लिविंग'को जिम्मेदार ठहराते हुए एनजीटी के आदेश को दरकिनार कर दिया; 5 करोड़ रुपये के रिफंड के निर्देश दिया |
| स्रोत निकाय | भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ |
| संदर्भ संख्या | व्यक्ति विकास केन्द्र भारत बनाम मनोज मिश्रा (मृत) आ ओआरएस। |C. A. नं. 683/2018 |
| स्थिति | बन्द भऽ गेल। (आदेश) |
| वर्ष। | 2026 |
| बन्द करबाक तिथि | — |
| दस्तावेजसभ | 1 |