Sunday, 8 November 2026 कौन ज़िम्मेदार?
कौन ज़िम्मेदार?KaunZimmedar

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न्यायालयसभ सर्वोच्च न्यायालय

उच्चतम न्यायालय सेवानिवृत्त प्रोफेसरक जी. पी. एफ. योजनाक दावा खारिज कऽ देलक।

मामला राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान (एन. आई. आर. डी.) क एक सेवानिवृत्त प्रोफेसरसँ सम्बन्धित अछि, जे घोषणा करबाक मांग कयलनि जे हुनका केन्द्रीय भविष्य निधि (सी. पी. एफ.) क स्थान पर सामान्य भविष्य निधि (जी. पी. एफ.) योजनामे शामिल करबाक चाही।

ई मामला राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान (एन. आई. आर. डी.) क एकटा सेवानिवृत्त प्रोफेसरसँ सम्बन्धित अछि, जे घोषणा करबाक मांग कयलनि जे विशिष्ट लाभ प्राप्त करबाक लेल हुनका केन्द्रीय भविष्य निधि (सी. पी. एफ.) योजनाक स्थान पर सामान्य भविष्य निधि (जी. पी. एफ.) योजनामे शामिल करबाक चाही। सर्वोच्च न्यायालय निर्धारित कयलक जे याचिकाकर्ता अपन सेवा नियमितताक शर्तक आधार पर एहि परिवर्तनक हकदार छल कि नहि।

ई कोना चिन्ता करैत अछिः याचिकाकर्ताः के. सुमन चन्द्र; उत्तरदाताः भारत संघ आ अन्य; पीठः न्यायमूर्ति उज्जल भुयान आ अतुल एस. चंदुरकर।

अदालत की फैसला कयलक?

  • सर्वोच्च न्यायालय विशेष अनुमति याचिका खारिज कऽ देलक।
  • अदालत निर्णय देलक जे याचिकाकर्ता श्री श्याम सुन्दर प्रसाद शर्मा के समान स्थित अछि, जकर मामला पहिने उच्चतम न्यायालय द्वारा सी. पी. एफ. योजना के पक्ष मे निर्णय देल गेल छल।
  • न्यायालयकेँ पता चलल जे याचिकाकर्ता 04.05.2012 दिनांकित अपन नियमितीकरण आदेशक नियम आ शर्तसभकेँ स्वीकार कयलक, जाहिमे ई निर्धारित कयल गेल छल जे सेवा सभ वर्तमान सी. पी. एफ. योजना द्वारा शासित रहैत रहत।
  • अदालत नोट कयलक जे याचिकाकर्ता सेवानिवृत्ति के बाद आ सी. पी. एफ. योजना के तहत लाभ स्वीकार करै के बाद ही शिकायत उठौलनि।
  • न्यायालय भारतक संविधानक अनुच्छेद 136क अन्तर्गत अधिकार क्षेत्रक प्रयोग करबासँ मना कऽ देलक।

दस्तावेजमे सेहो

  • न्यायालय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान बनाम श्याम सुन्दर प्रसाद शर्मा आ अन्य (निर्णय 28.02.2023) मे अपन पूर्व निर्णय पर भरोसा करैत कहलनि जे हुनका एहि मुद्दाकेँ फेरसँ खोलबाक कोनो कारण नहि भेटल।
  • न्यायालयक अवलोकन अछि जे नियमितकरण आदेश विशेष रूपसँ कहल गेल अछि जे ई जारी करबाक तिथि (04.05.2012) सँ प्रभावी होयत आ प्रारंभिक नियुक्ति तिथिसँ संबंधित नहि होयत।
  • याचिकामे विलम्बकेँ माफ कऽ देल गेल।

ई कोना लिखल गेल छल?

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आँकडाक जाँच कयल गेल। एहि सारांशमे प्रत्येक संख्या एकटा स्वचालित जाँच द्वारा दस्तावेजमे भेटल छल।

ओ जाँच तुलना करैत अछि। संख्यासभ मात्र। ई एहि बातक पुष्टि नहि कऽ सकैत अछि जे दस्तावेज जे कहैत अछि ओ शब्द कहल जाइत अछि-तेँ मूल दस्तावेज हमेशा प्राधिकरण होइत अछि।

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मूल दस्तावेज

भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ

अदालतक आदेश · 20 अगस्त 2026

आदेश। 20 अगस्त 2026 · 0.20 एमबी दस्तावेज खोलू। livelaw.in पर
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