Sunday, 8 November 2026 कौन ज़िम्मेदार?
कौन ज़िम्मेदार?KaunZimmedar

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न्यायालयसभ सर्वोच्च न्यायालय

सुप्रीम कोर्टक फैसलाः आत्महत्या के उकसाने के बदले झूठी एफ. आई. आर.

ई मामला उच्च न्यायालयक ओहि आदेशक विरुद्ध एकटा मृतक व्यक्तिक सास-ससुरक अपीलसँ संबंधित अछि जे हुनका पर आत्महत्या लेल उकसयबाक आरोप लगबैत प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफ. आई. आर.) केँ रद्द करयसँ इनकार कऽ देलक।

मुख्य मुद्दा ई अछि कि गलत एफ. आई. आर. दर्ज करब आ भरण-पोषण मांगब आत्महत्या लेल उकसाबाक कानूनी अपराध थिक कि नहि।

ई कोना चिन्ता करैत अछिः याचिकाकर्ता/अपीलकर्ताः पटेल जोशनाबेन प्रविन्कुमार पटेल आ अन्य (मृतकक सास, ससुर आ बहनोई)। उत्तरदाताः गुजरात राज्य आ अन्र (मृतकक भाय सहित)। पीठः न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा आ न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई।

अदालत की फैसला कयलक?

  • उच्चतम न्यायालय अपीलकेँ स्वीकार कऽ लेलक।
  • न्यायालय गुजरात उच्च न्यायालयक दिनांक 16.09.2025 क निर्णय आ आदेशकेँ रद्द कऽ देलक।
  • न्यायालय विवादित एफ. आई. आर. (2020क सी. आर. सं. 119930042001154) आ एकर परिणामस्वरूप भेल सभ कार्यवाहीकेँ रद्द कऽ देलक।
  • न्यायालयक निर्णय छल जे एफ. आई. आर. दर्ज करब, भले गलत हो, स्वयंमे कोनो व्यक्तिकेँ आत्महत्या करबाक लेल उकसयबाक समान नहि अछि।
  • न्यायालयकेँ पता चलि गेल जे एफ. आई. आर. आ सुसाइड नोटमे प्रथम दृष्टिसँ आत्महत्या लेल उकसयबाक मामलाक गठन करबाक लेल आवश्यक सामग्रीक खुलासा नहि कयल गेल अछि।
  • लंबित आवेदन, यदि कोनो हो, ओकर निपटान कऽ देल गेल।

दस्तावेजमे सेहो

  • अदालत नोट कयलक जे मृतकक खिलाफ प्रारंभिक एफ. आई. आर. दर्ज करबाक समय मृतकक पत्नीकेँ चिकित्सा रिपोर्टक समर्थनसँ चोट लागल छल।
  • न्यायालयक निरीक्षण छल जे अपीलार्थी मृतकसँ अलग रहैत छथि आ एहि कारणेँ हुनका आत्महत्या करबाक लेल पर्याप्त प्रभाव नहि मानल जा सकैत अछि।
  • अदालत कहलनि जे एकटा हताश पति सुसाइड नोटमे दोसरकेँ दोष दैत अछि जे प्राथमिक दृष्टिसँ उश्केरबाक मामलाकेँ बिना उश्केरणी या अत्यधिक उत्पीड़नक विशिष्ट कृत्यक प्रमाणक बिना समाप्त करबाक लेल पर्याप्त नहि अछि।
  • अदालत निर्देश देलक जे जाँचसँ पुष्टि भेल जे मृत्यु आत्महत्या छल, न कि हत्या।

ई कोना लिखल गेल छल?

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ओ जाँच तुलना करैत अछि। संख्यासभ मात्र। ई एहि बातक पुष्टि नहि कऽ सकैत अछि जे दस्तावेज जे कहैत अछि ओ शब्द कहल जाइत अछि-तेँ मूल दस्तावेज हमेशा प्राधिकरण होइत अछि।

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मूल दस्तावेज

भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ

अदालतक आदेश · 20 अगस्त 2026

आदेश। 20 अगस्त 2026 · 0.1 एमबी दस्तावेज खोलू। livelaw.in पर
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