Saturday, 7 November 2026 कौन ज़िम्मेदार?
कौन ज़िम्मेदार?KaunZimmedar

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न्यायालयसभ न्यायालय आ नियामकसभ

सर्वोच्च न्यायालय आधार योजनामे 1 अरब 1 लाखक नामांकनकेँ स्वीकार कयलक

ई आधार योजना आ आधार अधिनियम, 2016क संवैधानिक चुनौतीकेँ संबोधित करैत भारतक सर्वोच्च न्यायालयक निर्णय (2012क रिट याचिका (सिविल) संख्या 494 आ सम्बन्धित मामला) अछि।

नागरिकसभक लेल ई महत्वपूर्ण अछि किएक तँ ई राष्ट्रीय पहचान प्रणालीक कानूनी वैधता आ गोपनीयताक मौलिक अधिकार पर एकर प्रभावकेँ निर्धारित करैत अछि।

ई कोना चिन्ता करैत अछिः फैसला याचिकाकर्ता (न्यायमूर्ति के. एस. पुट्टास्वामी (सेवानिवृत्त) आ श्री प्रवेश खन्ना), उत्तरदाता (भारत संघ आ अन्य), भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यू. आई. डी. ए. आई.), आ आधार योजनामे नामांकित आम जनता (लगभग 11 करोड़ लोक) सँ सम्बन्धित अछि।

दस्तावेज मे की कहल गेल अछि?

  • ई मामला आधार योजनाकेँ चुनौती दैत अछि, जकर परिकल्पना 2006मे कयल गेल छल, जे 2009मे शुरू भेल छल, आ बादमे आधार (वित्तीय आ अन्य सब्सिडी, लाभ आ सेवाक लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016 द्वारा वैधानिक संरक्षण देल गेल छल।
  • याचिकाकर्ता सभक तर्क अछि जे आधार परियोजना भारतक संविधानक अनुच्छेद 21क अन्तर्गत निजताक मौलिक अधिकारक उल्लंघन करैत अछि आ एकटा निगरानी राज्यक निर्माण करैत अछि।
  • न्यायालय नोट करैत अछि जे ई योजना प्रारम्भमे 2016क अधिनियम पारित होयबासँ पहिने प्रशासनिक कार्रवाईक माध्यमसँ लागू कयल गेल छल।
  • फैसला मुख्य न्यायाधीश आ न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकरक पक्षसँ न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी द्वारा देल गेल अछि।
  • न्यायालय कहैत अछि जे ओ संवैधानिक प्रावधानक स्पर्शशिला पर वस्तुनिष्ठ रूपसँ मुद्दासभक जाँच करत, ई नोट करैत जे ई अंतर्राष्ट्रीय निकायसभक बाहरी विचार वा सार्वजनिक बहससँ प्रभावित नहि छल।

दस्तावेजमे सेहो

  • दस्तावेजमे उल्लेख अछि जे आधार योजनामे भारतमे लगभग 11 करोड़ लोकक नामांकन भेल अछि।
  • न्यायालय स्वीकार करैत अछि जे एहि मुद्दासँ गरमागरम सार्वजनिक बहस उत्पन्न भेल अछि, जाहिमे आम आदमी आ बुद्धिजीवी वर्ग दुनू योजनाक गुण आ जोखिम पर विभाजित अछि।
  • नीर्मयमे योज्नक एथिहासिक गट्ठन सनदरभ देल गेल अछी, जाहिमे 2006मे सुचना रोग विकास दिवस आनुमोदन आ 28 जनवरी, 2009मे अधिक सूचना सँख्या ए-43011/02/2009-Admn.I दवार यूइडिएआइएक गट्ठन सममित है।

ई कोना लिखल गेल छल?

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ओ जाँच तुलना करैत अछि। संख्यासभ मात्र। ई एहि बातक पुष्टि नहि कऽ सकैत अछि जे दस्तावेज जे कहैत अछि ओ शब्द कहल जाइत अछि-तेँ मूल दस्तावेज हमेशा प्राधिकरण होइत अछि।

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