सर्वोच्च न्यायालय आधार योजनामे 1 अरब 1 लाखक नामांकनकेँ स्वीकार कयलक
ई आधार योजना आ आधार अधिनियम, 2016क संवैधानिक चुनौतीकेँ संबोधित करैत भारतक सर्वोच्च न्यायालयक निर्णय (2012क रिट याचिका (सिविल) संख्या 494 आ सम्बन्धित मामला) अछि। ई नागरिकसभक लेल महत्वपूर्ण अछि कारण ई राष्ट्रीय पहचान प्रणालीक कानूनी वैधता आ गोपनीयताक मौलिक अधिकार पर एकर प्रभावकेँ निर्धारित करैत अछि।
फैसला याचिकाकर्ता (न्यायमूर्ति के. एस. पुट्टास्वामी (सेवानिवृत्त) आ श्री प्रवेश खन्ना), उत्तरदाता (भारत संघ आ अन्य), भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यू. आई. डी. ए. आई.), आ आधार योजनामे नामांकित आम जनता (लगभग 11 करोड़ लोक) सँ सम्बन्धित अछि।
- ई मामला आधार योजनाकेँ चुनौती दैत अछि, जकर परिकल्पना 2006मे कयल गेल छल, जे 2009मे शुरू भेल छल, आ बादमे आधार (वित्तीय आ अन्य सब्सिडी, लाभ आ सेवाक लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016 द्वारा वैधानिक संरक्षण देल गेल छल।
- याचिकाकर्ता सभक तर्क अछि जे आधार परियोजना भारतक संविधानक अनुच्छेद 21क अन्तर्गत निजताक मौलिक अधिकारक उल्लंघन करैत अछि आ एकटा निगरानी राज्यक निर्माण करैत अछि।
- न्यायालय नोट करैत अछि जे ई योजना प्रारम्भमे 2016क अधिनियम पारित होयबासँ पहिने प्रशासनिक कार्रवाईक माध्यमसँ लागू कयल गेल छल।
- फैसला मुख्य न्यायाधीश आ न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकरक पक्षसँ न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी द्वारा देल गेल अछि।
- न्यायालय कहैत अछि जे ओ संवैधानिक प्रावधानक स्पर्शशिला पर वस्तुनिष्ठ रूपसँ मुद्दासभक जाँच करत, ई नोट करैत जे ई अंतर्राष्ट्रीय निकायसभक बाहरी विचार वा सार्वजनिक बहससँ प्रभावित नहि छल।
ए. आई. द्वारा दस्तावेजसँ लिखल गेल आ ओकर विरुद्ध जाँच कयल गेल। नीचाँ देल गेल मूल आधिकारिक अछि।
मूल दस्तावेज
दस्तावेजक विवरण
| आधिकारिक शीर्षक | जखन देखनाइ रिकॉर्डिंग बनि जाइत अछिः अदृश्य दर्शक आ भारतीय गोपनीयता कानूनक सीमा |
| स्रोत निकाय | प्रेस द्वारा सार्वजनिक कयल गेल सरकारी दस्तावेज |
| संदर्भ संख्या | c184e829d7034fb2 |
| स्थिति | बन्द भऽ गेल। (एस. सी. निर्णय) |
| वर्ष। | — |
| बन्द करबाक तिथि | — |
| दस्तावेजसभ | 1 |