सर्वोच्च न्यायालय बलात्कार मामलामे फोरेंसिक परीक्षणक विश्वसनीयताक हवाला दैत बरी करबाक अपीलकेँ खारिज कऽ देलक।
ई मामला हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा बलात्कारक दोषी ठहराओलाक विरुद्ध राम सिंहक अपीलसँ सम्बन्धित अछि, जे निचली अदालत द्वारा हुनका बरी कयलाक निर्णयकेँ पलट देलक छल। सर्वोच्च न्यायालय जाँच कयलक जे अभियोजन पक्षक साक्ष्य, विशेष रूपसँ फोरेंसिक आ चिकित्सा रिपोर्ट, दोषसिद्धिक समर्थन करैत अछि कि नहि।
याचिकाकर्ताः राम सिंह; प्रतिवादीः हिमाचल प्रदेश राज्य; पीठः न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर।
- अदालत नोट कयलक जे निचली अदालत अपर्याप्त साक्ष्य आ गवाहक गवाहीमे विसङ्गतिक कारण अपीलार्थीकेँ बरी कऽ देलक।
- न्यायालयक निरीक्षण अछि जे उच्च न्यायालय अंतिम चिकित्सा रिपोर्ट अथवा राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) रिपोर्टक उल्लेख कयल बिना दोषमुक्त करबाक निर्णयकेँ पलट देलक।
- अदालत एहि बात पर जोर देलक जे एफएसएल रिपोर्टमे पीड़ितक कपड़ापर, अपीलकर्ताक अंडरगार्मेंट पर, या जब्त चटई आ बैठकक पर कोनो खून या वीर्य नहि भेटल।
- अदालत नोट कयलक जे चिकित्सा अधिकारीकेँ पीड़ितकेँ कोनो चोट नहि भेटल आ एकटा अक्षुण्ण हिमन भेटल।
- अदालत कहलनि जे खून आ चोटक अनुपस्थिति अभियोजन पक्षक घटनासभक संस्करणक संबंधमे गम्भीर संदेह उत्पन्न करैत अछि।
ए. आई. द्वारा दस्तावेजसँ लिखल गेल आ ओकर विरुद्ध जाँच कयल गेल। नीचाँ देल गेल मूल आधिकारिक अछि।
मूल दस्तावेज
दस्तावेजक विवरण
| आधिकारिक शीर्षक | सर्वोच्च न्यायालय बलात्कार मामलाक दोषमुक्तिकेँ बहाल कयलक कारण फोरेंसिक साक्ष्य अभियोजन संस्करणक विपरीत अछि। |
| स्रोत निकाय | भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ |
| संदर्भ संख्या | — |
| स्थिति | बन्द भऽ गेल। (आदेश) |
| वर्ष। | 2026 |
| बन्द करबाक तिथि | — |
| दस्तावेजसभ | 1 |