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SC अदालतक आदेश
विभिन्न सी. पी. सी. प्रावधानक अन्तर्गत क्रमिक कार्यान्वयन आवेदनसभ पर रेज़ जुडिकाटा लागू होइत अछिः उच्चतम न्यायालय
सादा-भाषाक सारांश (ए. आई. द्वारा उत्पन्न) - जल्दी पढ़ू जाहि सँ अहाँकेँ पूरा पी. डी. एफ. नहि खोलय पड़त। त्रुटि भऽ सकैत अछि; नीचाँ देल गेल मूल दस्तावेज आधिकारिक अछि।
ई मामला कोना अछि?
एहि मामलामे विभिन्न सी. पी. सी. प्रावधानक अन्तर्गत बादक खरीदारसभ द्वारा आरोपपत्रक आवेदनकेँ अनुमति देबाक उच्च न्यायालयक आदेशकेँ चुनौती देबाक लेल एकटा दीवानी अपील सम्मिलित अछि, जाहिमे मुख्य मुद्दा ई अछि जे क्या न्यायनिर्णय लगातार आरोपपत्रक आवेदनपर लागू होइत अछि।
ई कोना चिन्ता करैत अछि?
याचिकाकर्ताः संजीव कुमार; उत्तरदाताः शकुंतला देवी आ अन्य; पीठः ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, जे।
अदालत की आदेश देलक?
- उच्च न्यायालय विलम्बकेँ क्षमा करबाक, दोसर अपीलकेँ पुनर्स्थापित करबाक, आ मुख्य अपील आ प्रति-आपत्तिसभमे प्रत्यर्थी संख्या 3 आ 4केँ नियुक्तिक रूपमे प्रस्तुत करबाक लेल आवेदनकेँ अनुमति देलक।
- न्यायालयक निर्णय छल जे सी. पी. सी. क विभिन्न प्रावधानक अन्तर्गत लगातार आरोप-प्रत्यारोपक अनुप्रयोग पर न्यायनिर्णयक सिद्धान्त लागू नहि होइत अछि।
- आदेश I नियम 10 सी. पी. सी. क अन्तर्गत आरोप-प्रत्यारोपकेँ खारिज करबाक दिनांक 19.05.2000 क उच्च न्यायालयक पहिनेक आदेश एकटा गलत धारणा पर आधारित पाओल गेल छल आ आदेश XXII नियम 10 सी. पी. सी. क अन्तर्गत बादक आवेदनक लेल बाध्यकारी नहि भेटल छल।
| स्रोत निकाय | भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ |
| संदर्भ संख्या | — |
| स्थिति | बन्द भऽ गेल। (खण्डः आदेश) |
| वर्ष। | 2026 |
| बन्द करबाक तिथि | — |
| दस्तावेजसभ | 1 |
मुख्य आकर्षण आ पूछबाक योग्य बिन्दुसभ
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दस्तावेजसभ
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आदेश।
2026-07-28
res-judicata-applies-to-successive-impleadment-applications.pdf
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