न्यायालयसभ सर्वोच्च न्यायालय
उच्चतम न्यायालय 1988क हत्या मामलामे बरीक फैसला बहाल कयलक।
ई मामला एकटा आपराधिक अपीलसँ सम्बन्धित अछि जे उच्च न्यायालयक ओहि आदेशकेँ चुनौती दैत अछि जे 1988क हत्याक मामलाकेँ साक्ष्य, विशेष रूपसँ प्रत्यक्षदर्शीक गवाही आ भारतीय कानूनक धारा 27क अन्तर्गत वसूली पर पुनः विचार करबाक लेल पुनः निचली अदालतमे भेज देलक छल।
ई मामला एकटा आपराधिक अपीलसँ सम्बन्धित अछि जे उच्च न्यायालयक ओहि आदेशकेँ चुनौती दैत अछि जे 1988क हत्याक मामलाकेँ साक्ष्य, विशेष रूपसँ प्रत्यक्षदर्शीक गवाही आ भारतीय साक्ष्य अधिनियमक धारा 27क अन्तर्गत बरामतक फेरसँ विचार करबाक लेल निचली अदालतमे वापस पठा देलक। सर्वोच्च न्यायालय समीक्षा कयलक कि अभियोजन पक्षक साक्ष्यक विश्वसनीयताक आधार पर अभियुक्तक दोषमुक्तिकेँ पुनःस्थापित कयल जाय।
ई कोना चिन्ता करैत अछिः अपीलकर्ताः खलील पाशा और अन्य (अभियुक्त); उत्तरदाताः अब्दुल रशीद और अनर (पीड़ित पक्ष/संशोधन याचिकाकर्ता); पीठः न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन।
अदालत की फैसला कयलक?
- न्यायालय अपील करबाक अनुमति देलक।
- न्यायालयक मत छल जे पीड़ितक पुनरीक्षण याचिका पर डिवीजन बेंच या सिंगल बेंच द्वारा सुनवाई अनिवार्य अछि कि नहि, ई सवाल वैधानिक बदलावक कारण शैक्षणिक अछि।
- नियाली नोट काल्क जे 2009 मे धारा 372 Cr.P.C क संशोधनक आनतरगत पीड़कक बेरी कारक विरुद्ध अपील कारक अधिक, जे अहन मामीलामे संशोधन के हाटा द्यात अछि।
- न्यायालय विचारण न्यायालयक नेतृत्वमे साक्ष्यक पुनः प्रशंसा पर एहि मामलापर विचार करबाक निर्णय लेलक।
- अदालत प्रत्यक्षदर्शी (पीडब्लू3, पीडब्लू4, पीडब्लू8) आ चिकित्सक (पीडब्लू1, पीडब्लू11) के गवाही के विश्लेषण केलक, मृतक के चेतना आ घटना स्थल के बारे मे विसङ्गति के नोट केलक।
- अदालत एहि बात पर जोर देलक जे भारतीय साक्ष्य अधिनियमक धारा 27क तहत वसूली आ रासायनिक विश्लेषण रिपोर्ट अभियोजन पक्षक मामलाक हिस्सा छल मुदा प्रदान कयल गेल पाठमे दोषसिद्धि/बरीक स्थिति पर अंतिम आदेश स्पष्ट रूपसँ नहि बतौलनि, यद्यपि शीर्षकसँ पता चलैत अछि जे बरीक स्थिति बहाल कऽ देल गेल छल।
दस्तावेजमे सेहो
- कथित रूपसँ ई घटना 14.02.1988 पर भेल छल।
- अभियुक्त 1988 सँ कानूनी कार्यवाहीक अधीन छल।
- अटलट नोट केल्क जे ममला खरज कर्बक उच्छ नियालिक पुरर्व देश धारा 401 (2) Cr.P.C क उल्लंघन करतत सुने बीना परित कल गेल छ्ल।
- अदालतकेँ पता चलल जे प्रत्यक्षदर्शी'आकस्मिक गवाह'छलाह आ घायललोकनिक निकट परिचित छलाह, जाहिसँ हुनक गवाही पर संदेह उत्पन्न भेल।
ई कोना लिखल गेल छल?
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मूल दस्तावेज
भारतक सर्वोच्च न्यायालय-आदेश आ निर्णयसभ
अदालतक आदेश · 28 जुलाई 2026
एकरा एतऽ पढ़ू।
चर्चा।
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