सिख गुरुद्वार (संशोधन) विधेयक, 2016
यह कानून क्या करता है?
यह कानून सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1925 में एक छूट को हटाने के लिए संशोधन करता है जो सहजधारी सिखों (सिख जो सभी धार्मिक प्रथाओं का पालन नहीं करते हैं) को गुरुद्वारा बोर्डों के चुनावों में मतदान करने की अनुमति देता है, जिसमें सभी मतदाताओं को विशिष्ट धार्मिक और व्यवहार नियमों का पालन करने की आवश्यकता होती है।
यह किसे प्रभावित करता है?
सिख जो किसी निर्वाचन क्षेत्र के निवासी हैं और गुरुद्वारा बोर्ड या समितियों के चुनाव में मतदान करना चाहते हैं।
प्रमुख प्रावधान
- मतदाताओं को अपनी दाढ़ी या केश न काटने या मुंडन करने की आवश्यकता होती है (सहजधारी सिखों को छोड़कर, जिन्हें अब छूट से बाहर रखा गया है)
- मतदाताओं के लिए धूम्रपान पर प्रतिबंध
- मतदाताओं के लिए शराब पीने पर प्रतिबंध
- 8 अक्टूबर, 2003 से पूर्वव्यापी रूप से लागू होता है
ध्यान देने योग्य बिंदु
- यह सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1925 में एक पूर्वव्यापी संशोधन है।
- यह 2003 की उस अधिसूचना को निरस्त करता है जिसमें पहले सहजधारी सिखों को मतदान करने की अनुमति दी गई थी।
| स्रोत निकाय | भारत की संसद-विधेयक (लोकसभा और राज्यसभा) |
| संदर्भ संख्या | XVII |
| स्थिति | बंद कर दिया (खंडः बिल) |
| वर्ष | 2016 |
| समापन तिथि | — |
| दस्तावेज़ | 3 |
पूछने लायक मुख्य बातें और बिंदु
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दस्तावेज़
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